मनुष्यों और प्रकृति के बीच क्या संबंध है?
मनुष्य और प्रकृति (कुदरत) के बीच क्या संबंध है? यह सवाल बिलकुल ही बेमानी (निरर्थक) है | जो संबंध हम सभी सदियों से ढूँढते आ रहें हैं वह हम सभी के अंदर और आसपास ही हर पल देखा या महसूस किया जा सकता है | असल में हमें जिस ने बनाया, आकार दिया और विकसित किया उसे भूलकर हम खुद ही माने भगवानों को पूजते बैठे हैं | यह इंसानी प्रजाति की सबसे बड़ी शोकांतिका है |
प्रकृति ही परमेश्वर है लेकिन मनुष्य जाती का अहंकार, हेकड़ी और घोर अज्ञान इसी परमेश्वर की अवहेलना करने पे और उसीको चुनौती देने पर तुला हुआ है | परिणामस्वरूप आज मनुष्य जातीपर अस्तित्व नष्ट होने का संकट मंडरा रहा है | दूसरी कई प्रजातियाँ हमारे ही कारण ख़तरेमें हैं |
हम जो नाटकीय बदलाव और प्रकृति का रौद्र रूप देख रहें हैं यह तो बस आंरभ है | प्रकृति इतनी शीघ्रता, आसानी और सहजता से मनुष्य जाती को क्षमा नहीं करेगी | हमारी करतूतोंका हिसाब-क़िताब हमें चुकाना ही
होगा |
प्रकृति और मनुष्य जाती के कुछ ना झुटलाये जानेवाले सच:
१. जैसे शरीर के बाहर विशाल पर्यावास (Ecosystem) है वैसे शरीर के भीतर भी एक जटिल और विस्तृत पर्यावास है और वह बाहरी पर्यावास से जुड़ा हुआ रहता है |
२. हमारे शरीर के अंदर और शरीरके भिन्न भिन्न भागोंमें बसनेवाले जीवाणु (बैक्टीरिया) प्रकृति की देन है जिन के बिना हम जीवित नहीं रह सकते |
३. हम पृथ्वी और प्रकृति से मिलनेवाले संसाधनोपर ही निर्भर है जिसे हम स्वयं के शरीर के अंदर और शरीर के द्वारा निर्माण नहीं कर सकते |
४. हमारे शरीर, बुद्धि, चेतना और इन्द्रियोंको इसी सृजनशील प्रकृति ने ही पिछले करोड़ो सालों के दौरान भिन्न भिन्न चरणों में आकार दिया है |
५. शरीर का हर एक कण इसी धरती के भिन्न भिन्न तत्वों और धातुओंसे से बना हुआ है | कुछ तत्त्व धरती के बहार से आये हुए हैं |
६. हर एक जीव इस विशाल, गतिशील और जटिल प्रकृति का एक छोटा प्रयोग, निर्माण और प्रतिरूप यह तीनों ही है |
७. मनुष्यों की ही तरह प्रकृति और भी कई बुद्धिमान जीवोंका निर्माण करने और उनको विकसित करने में मग्न है |
८. प्रकृति ना ही पूर्ण रूप से क्रूर है या दयालु है | वह तो केवल बदलाव के साथ ढ़लनेवालों का चयन करती है |
९. प्रकृति पर विजय पाना कठिन ही नहीं बल्कि असंभव है परन्तु उसके अनुसार बदलना भी एक चुनौती है |
१०. मनुष्य प्रजाति अप्राकृति मार्गोंसे से ज़्यादा वर्षोंतक पृथ्वी या बाहर के किसी ग्रहपर टिक नहीं पायेगी |
इस प्रामाणिक एवं सत्याधारित उत्तर से मुझे पूर्ण आशा है की लोग प्रकृति के साथ खुद को जुड़ा हुआ पाएंगे | समस्त प्रकृति हमारे वैज्ञानिकों ने खोजे हुए और कुछ अनखोजे नियमोंपर काम करती रहती है | उस के ऐसे कई राज़ (रहस्य) हैं जो हमारी बुद्धि से परे है और वह शायद अनसुलझे ही रहेंगे |

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